सेक्सी नौकरानी जमकर चुदी | Antarvasna

साहिल

मेरा अपना अनुभव कहता है कि किसी भी लड़की को गरम करके चोदने में बड़ा मज़ा आता है, लेकिन बस उस लड़की को गरम करने का तरीका एकदम ठीक होना चाहिए। दोस्तों मैंने अपने घर की नौकरानी को ऐसे ही गरम करके बहुत मज़े से choda जिसकी सच्ची कहानी आज में आप सभी को कामुकता डॉट कॉम पर आपके लिए बहुत मेहनत से लिखकर सुनाने के लिए आया हूँ और में उम्मीद करता हूँ कि यह घटना आप लोगो को जरुर पसंद आएगी, क्योंकि जब mujhe चुदाई करने में इतना मज़ा आया तो आपको पढ़ने में क्यों नहीं आएगा? दोस्तों मेरा नाम साहिल है और में लखनऊ उत्तरप्रदेश का रहने हूँ, उस समय तक मेरे घर में बहुत सारी नौकरानियां काम करने आई और वो सभी भी चली गई, लेकिन बहुत अरसे के बाद meri अच्छी किस्मत से एक बहुत ही सुंदर और सेक्सी नौकरानी मेरे घर पर काम पर आने लगी। दोस्तों उसकी उम्र करीब 22-23 year होगी, उसका रंग सांवला था ठीक ठाक लम्बाई और सुडौल बदन और उसके बूब्स का आकार करीब 33-29-36 होगा, वो शादीशुदा थी। fir में हमेशा मन ही मन उसको देखकर सोचा करता था कि उसका पति कितना किस्मत वाला है, जिसको इतनी मस्त पत्नी मिली है और वो yearा उसको बहुत जमकर चोदता होगा। दोस्तों उसके बूब्स यानी गोलाईयां ऐसी थी कि उनको देखकर मेरा मन करता कि बस में उनको दबाता ही रहूँ और उसके बूब्स का आकार इतना बड़ा था कि वो उसके ब्लाउज में समाते ही नहीं थे।

fir वो अपनी उभरी हुई छाती को कितनी ही बार अपनी साड़ी के पल्लू से ढकती, लेकिन fir भी उसके गोल गोल बूब्स इधर उधर से उसके ब्लाउज से उभरते हुए दिख ही जाते थे। fir वो जब भी झाड़ू लगाते हुए झुकती तब उसके बड़े गले के उस ब्लाउज के ऊपर से उसके बूब्स के बीच की दरार उस सकड़ी सी गली को वो कैसे भी ना छुपा सकती थी। fir वो मनमोहक द्रश्य mujhe कैसे भी नजर आ ही जाता था, जिसको देखकर मेरा लंड मस्ती में आकर झूमने लगता था। एक दिन जब मैंने उसकी इस दरार को अपनी तिरछी नजर से, लेकिन थोड़ा सा गौर करके देखा तब mujhe पता लगा कि उसने ब्रा तो पहनी ही नहीं थी। दोस्तों वो कहाँ से पहनती? क्योंकि ब्रा के ऊपर बेकार में पैसे क्यों खर्च किए जाए? जब वो ठुमकती हुई चलती तो उसके दोनों मदमस्त कूल्हे हिलते हुए बहुत आकर्षक नजर आते और वो जैसे मुझसे कह रहे हो कि तुम जल्दी से mujhe पकड़ लो और ज़ोर ज़ोर से दबाओ। fir वो अपनी पतली सी सूती साड़ी को जब संभालती हुई सामने से अपनी choot के ऊपर अपना एक हाथ रखती तब मेरा मन वो सब देखकर करता कि काश में उसकी choot को छू सकता।

दोस्तों उसकी वो एकदम करारी गरम फूली हुई और गीली कामुक choot में कितना मस्त मज़ा भरा हुआ था? काश में उसको चूम भी सकता। उसके बूब्स को दबा भी सकता और उसकी निप्पल को अपने मुहं में लेकर ज़ोर ज़ोर से चूस भी सकता और उसकी choot को चूसते हुए में जन्नत का मज़ा ले सकता और fir में अपना तना हुए लंड उसकी choot में डालकर उसकी चुदाई भी कर सकता। दोस्तों अब मेरा choot का प्यासा लंड मानता ही नहीं था, वो उसकी choot में जाने के लिए बहुत बेकरार था और उसकी चुदाई करने के लिए तरस रहा था, लेकिन वो सब कैसे होगा? क्योंकि वो तो mujhe कभी देखती ही नहीं थी, बस वो तो अपने काम से मतलब रखती और ठुमकती हुई चली जाती। दोस्तों वैसे मैंने भी उसको कभी भी इस बात का एहसास नहीं होने दिया कि meri नज़र उसको चोदने के लिए बेताब है और में हमेशा उसकी चुदाई के सपने देखा करता हूँ, लेकिन अब कैसे भी करके उसको एक बार chodna तो था ही इसलिए मैंने अब मन ही मन सोच लिया था, कि mujhe अब इसको अपनी तरफ आकर्षित करना ही होगा और धीरे धीरे अपनी बातों में उसको फंसना भी पड़ेगा वरना, वो कहीं मचल जाए या नाराज़ हो जाये तो मेरा भांडा फूट जाएगा, इसलिए अब मैंने उसके साथ थोड़ी थोड़ी बातें करना शुरू कर दिया था, उसका नाम आरती था।

एक दिन सुबह मैंने उसको चाय बनाने के लिए कहा उसने तुरंत रसोईघर में जाकर कुछ देर बाद मेरा काम कर दिया, वो मेरे लिए चाय लेकर आ गई और अब उसके नरम नरम हाथों से जब मैंने चाय को लिया तो मेरा लंड उसको छूकर उछल पड़ा। अब में उसको अपनी प्यासी नजरों से देखने लगा और fir मैंने चाय पीते हुए उसको कहा कि आरती वाह मज़ा आ गया, चाय तो तुम बहुत अच्छी बना लेती हो। fir उसने जवाब दिया कि meri चाय की तारीफ करने के लिए बाबूजी आपको बहुत धन्यवाद। अब में करीब करीब हर दिन उसी से मेरे लिए चाय बनवाता और उसकी चाय की तारीफ करता और वो मुझसे अपनी बढाई सुनकर बहुत खुश होकर धन्यवाद कहकर चली जाती और इस तरह में धीरे धीरे आगे बढ़ने लगा था। fir मैंने एक दिन अपने कॉलेज जाने से पहले अपनी एक शर्ट को आरती से प्रेस करवाई। मैंने उसको कहा कि आरती तुम प्रेस भी बहुत अच्छी कर लेती हो, प्लीज इसके ऊपर भी प्रेस कर दो। fir उसने कहा कि हाँ ठीक है बाबूजी आप mujhe दे दीजिए उसने मुझसे अपनी बहुत प्यारी सी आवाज़ में कहा और जब आसपास कोई भी नहीं होता, तब में सही मौका देखकर उसके साथ इधर उधर की बातें करता, जैसे आरती तुम्हारा पति क्या करता है? fir वो कहती साहब वो एक मिल में नौकरी करता है।

अब मैंने उसको पूछा उसकी वहां पर कितने घंटे की नौकरी होती है? वो बोली साहब 10-12 घंटे तो लग ही जाते है और कभी कभी तो उनकी रात को भी ड्यूटी लग जाती है। fir मैंने उसको पूछ लिया कि तुम्हारे कितने बच्चे है? तभी शरमाते हुए उसने जवाब दिया कि अभी तो दो year की एक लड़की है। fir मैंने पूछा क्या तुम उसको तुम्हारे घर में अकेला छोड़कर आती हो? वो बोली कि नहीं meri बूढ़ी सास भी मेरे घर में है ना, वो उसको संभाल लेती है। अब मैंने उसको पूछा कि तुम कितने घरों में काम करती हो? वो कहने लगी कि साहब बस आपके और एक नीचे वाले घर में। अब मैंने fir से पूछा तो क्या तुम दोनों का इस कमाई से काम तो चल ही जाता होगा? वो कहने लगी कि हाँ साहब काम चलता तो है, लेकिन बड़ी मुश्किल से क्योंकि मेरा आदमी शराब में बहुत पैसे बर्बाद कर देता है। दोस्तों अब मैंने उसकी मजबूरी को जानकर उसको एक बात कहना उचित समझा मैंने संभालते हुए उसको कहा कि ठीक है कोई बात नहीं में तुम्हारी मदद करूँगा। अब उसने मेरे मुहं से यह बात सुनकर mujhe एक बहुत अजीब सी नज़र से देखा जैसे वो मुझसे बिना कुछ कहे अपनी नजर से पूछ रही हो क्या मतलब है आपका? तभी मैंने तुरंत उसको कहा कि मेरा मतलब है कि तुम अपने आदमी को मेरे पास लाओ में उसे समझाऊँगा।

अब उसने हाँ ठीक है साहब कहते हुए ठंडी सांस भरी। इस तरह दोस्तों मैंने उसके साथ वो बातों का सिलसिला बहुत दिनों तक जारी रखा और मैंने हम दोनों के बीच की झिझक को मिटा दिया। एक दिन मैंने शरारत से कहा कि तुम्हारा आदमी पागल ही होगा अरे यार उसको भी समझना चाहिए कि इतनी सुंदर पत्नी के होते हुए भी उसको शराब की क्या ज़रूरत है? दोस्तों वैसे औरत बहुत तेज़ होती है उसने meri बातों को कुछ कुछ समझ तो लिया था, लेकिन अभी तक उस बात का उसने mujhe अपनी तरफ से ज़रा सा भी नाराज़गी का अहसास नहीं होने दिया और अब mujhe भी ज़रा सा अनुमान मिल गया कि यह बड़े आराम से तस्वीर में उतार जाएगी, सही मौका मिले और में इसको दबोच लूँ, यह मुझसे अपनी चुदाई जरुर करवा लेगी और आख़िर एक दिन मेरे हाथ एक ऐसा मौका लग ही गया। वो कहते है ना कि ऊपर वाले के यहाँ देर है, लेकिन अंधेर नहीं। दोस्तों वो रविवार का दिन था हमारा पूरा परिवार एक शादी में गया हुआ था, में अपनी पढ़ाई की खोटी होने की वजह बताकर उनके साथ नहीं गया। meri मम्मी mujhe कहकर गई थी कि आरती आएगी तुम उसको कहना घर का काम ठीक से कर दे। अब मैंने कहा कि हाँ ठीक है और अब मेरे दिल में खुशी के लड्डू फूटने लगे और मेरा लंड चुदाई की बात सोचकर खड़ा होने लगा।

fir वो अपने ठीक समय पर आ गई और उसने दरवाज़ा अंदर से बंद किया और fir अपने काम पर लग गयी। दोस्तों इतने दिन की बातचीत से अब हम दोनों बहुत ज्यादा खुल चुके थे और उसको मेरे ऊपर एक विश्वास सा हो गया था, इसलिए उसने दरवाज़ा बंद कर दिया। अब मैंने उसको हमेशा की तरह चाय बनवाने के लिए कहा और चाय को पीते हुए में उसकी चाय की बढाई करने लगा और तब मन ही मन मैंने निश्चय किया कि आज तो mujhe इसके साथ पहल करनी ही पड़ेगी वरना meri गाड़ी आज मेरे हाथ से छूट जाएगी और fir में सोचने लगा कि कैसे पहल करूं? तब आख़िर में mujhe विचार आया कि भाई सबसे बड़ा रुपैया। अब मैंने उसको अपने पास बुलाया और कहा कि आरती तुम्हे पैसे की ज़रूरत हो तो तुम mujhe ज़रूर बता देना तुम बिल्कुल भी झिझकना मत। fir वो बोली कि इतनी महरबानी करने के लिए धन्यवाद साहब, लेकिन आप meri पगार से काट लोगे और मेरा आदमी mujhe इसके लिए बहुत डांटेगा। अब मैंने उसको कहा कि अरे पगली में तुझसे पगार की बात नहीं कर रहा हूँ, तुझे बस कुछ और पैसे अलग से चाहिए तो में वो मदद के लिए दे दूँगा और किसी को नहीं बताऊँगा, लेकिन बशर्ते तुम भी किसी को ना बताओ तो और में अब उसके जवाब का इंतज़ार करने लगा।

अब वो बोली कि भला में क्यों किसी को बताने लगी, लेकिन क्या आप सच में mujhe कुछ पैसे देंगे? दोस्तों बस fir क्या था? लड़की पट गयी बस अब mujhe आगे बढ़ना था और मलाई खानी थी, मैंने उसको कहा कि हाँ आरती में तुझे पैसे ज़रूर दूँगा। मैंने उसको पूछा क्यों इससे तुम्हे खुशी मिलेगी ना? अब वो बोली कि हाँ साहब बहुत आराम हो जाएगा उसने इठलाते हुए कहा। अब मैंने भी धीमी आवाज से कहा और mujhe भी खुशी मिलेगी अगर तुम भी कुछ ना कहो तो और अब जैसा में तुमसे कहूँ तुम ठीक वैसा ही करो तो? बोलो क्या तुम्हे मंज़ूर है? यह बात कहते हुए मैंने उसके हाथ में 500 रुपये थमा दिए, लेकिन उसने वो रुपये टेबल पर रख दिए और fir वो मुस्कुराते हुए मुझसे पूछने लगी कि mujhe क्या करना होगा साहब? अब मैंने उसको कहा कि तुम पहले अपनी आँखें बंद करो। में यह बात कहते हुए उसकी तरफ थोड़ा सा आगे बढ़ा और मैंने उसको कहा कि तुम बस अब थोड़ी देर के लिए अपनी आँखें बंद करो और चुपचाप खड़ी रहो। fir उसने उसी समय अपनी दोनों आखों को बंद कर लिया, मैंने एक बार fir से कहा कि आरती में जब तक तुमसे ना कहूँ तुम अपनी आँखें बंद ही रखना वरना तुम अपनी शर्त हार जाओगी। अब वो बोली कि हाँ ठीक है साहब और वो शरमाते हुए अपनी दोनों आँखें बंद करके चुपचाप मेरे सामने खड़ी थी।

अब मैंने देखा कि उसके गाल लाल हो चुके थे और होंठ काँप रहे थे, अपने दोनों हाथों को उसने सामने अपनी जवान choot के पास समेट रखा था। fir मैंने हल्के से पहले उसके माथे पर एक छोटा सा चुंबन किया, लेकिन अभी तक मैंने उसको छुआ नहीं था और अब भी उसकी आँखें बंद थी। fir उसके बाद मैंने उसकी दोनों पलकों पर बारी बारी से एक एक चुंबन रखा और उसकी आँखें अभी भी बंद थी। उसके बाद मैंने उसके दोनों गालों पर धीरे से बारी बारी से चूमा। उसकी आँखें अब भी बंद थी, लेकिन इधर मेरा लंड तनकर लोहे की तरह खड़ा और सख़्त हो गया था। fir मैंने उसके होंठो के नीचे चुंबन लिया, अब उसने आँखें खोली और सिर्फ पूछते हुए कहा साहब? मैंने उसको कहा कि आरती तुम शर्त हार जाओगी आँखें बंद, उसने झट से आँखें बंद कर ली। अब में तुरंत समझ गया था कि यह लड़की अब पूरी तरह से तैयार है, बस अब mujhe इसका मज़ा लेना है और इसकी जमकर चुदाई करनी है। दोस्तों मैंने अब की बार उसके थिरकते हुए होठों पर हल्का सा चुंबन किया और अभी तक मैंने उसको छुआ नहीं था। अब उसने एक बार fir से आँखें खोली और मैंने हाथ के इशारे से उसकी पलकों को दोबारा से ढक दिया और अब में बिना देर किए आगे बढ़ा उसके दोनों हाथों को सामने से हटाकर मैंने अपनी कमर के आसपास रखा और उसको अपनी बाहों में समेट लिया। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

अब मैंने उसके गुलाबी काँपते हुए होठों पर अपने होंठ रख दिए और चूमता रहा इस बार मैंने उनको कसकर चूमा वाह क्या नरम होंठ थे? मानो शराब के प्याले मैंने होठों को चूसना शुरू किया और fir कुछ देर बाद उसने भी अपनी तरफ से जवाब देना शुरू किया। अब उसके दोनों हाथ meri पीठ पर इधर उधर घूम रहे थे और में उसके गुलाबी होठों को बहुत मज़े लेकर चूस चूसकर उसको गरम कर रहा था। तभी mujhe महसूस हुआ कि उसके बूब्स जो कि अब तक तन चुके थे वो meri छाती से दब रहे थे और अपने एक हाथ से में उसकी पीठ को अपनी तरफ दबा रहा था और अपनी जीभ से उसकी जीभ और होठों को चूस रहा था। fir अपने दूसरे हाथ से मैंने उसकी साड़ी के पल्लू को नीचे गिरा दिया, मेरा वो हाथ अब अपने आप उसके बूब्स पर चला गया और मैंने उसको दबाया वाह क्या मस्त बूब्स थे उसके? वो बहुत ही मुलायम थे। अब मेरा लंड फूँकारे मार रहा था, मैंने अपने दूसरे हाथ से उसके कूल्हों को अपनी तरफ दबाया और उसको अपने लंड की गरमी मोटाई को महसूस करवाया। दोस्तों एक शादीशुदा लड़की को chodna बहुत आसान होता है, क्योंकि उन्हे सब कुछ आता है वो कभी किसी भी काम के लिए घबराती नहीं है और इन सभी कामो में बहुत अनुभवी होती है।

दोस्तों ब्रा तो उसने पहनी ही नहीं थी, उसके ब्लाउज के बटन पीछे थे। अब मैंने अपने एक हाथ से उसके बटन को खोल दिया और ब्लाउज को उतार फेंका उसके बूब्स जैसे उसमे क़ैद थे वो अब उछलकर मेरे हाथों में आ गए। fir मैंने महसूस किया कि वो एकदम गरम थे, लेकिन रुई की तरह मुलायम प्यारे भी थे। मैंने अब उसकी साड़ी को खोलकर उतार दिया। दोस्तों वो अब खड़ी भी नहीं हो पा रही थी, में उसको हल्के हल्के से अपनी तरफ खींचते हुए अपने कमरे में ले आया और मैंने उसको लेटा दिया। अब मैंने उसको कहा कि आरती रानी अब तुम अपनी आँखें खोल सकती हो। fir वो मुस्कुराते हुए कहने लगी कि साहब आप बहुत पाजी है और शरमाते हुए उसने आँखें खोली और दोबारा बंद भी कर लिया। अब मैंने झट से अपने कपड़े उतारे और में तुरंत नंगा हो गया, मेरा लंड जोश में आकर तनकर उछल रहा था, मैंने उसके पेटीकोट को जल्दी से खोला और खींचकर उतार दिया और देखा कि उसने अंदर पेंटी नहीं पहनी थी। अब मैंने उसको पूछा यह क्या तुम्हारी choot तो नंगी है? क्या तुम पेंटी नहीं पहनती? fir वो कहने लगी कि नहीं साहब में सिर्फ महीने के उन दिनों में पहनती हूँ और वो शरमाते हुए कहने लगी साहब पर्दे खिचकर बंद करो ना, रौशनी से mujhe बहुत परेशानी होती है।

fir मैंने झट से पर्दों को बंद किया, जिसकी वजह से बेडरूम में थोड़ा अंधेरा हो और अब में उसके ऊपर लेट गया, होठों को कसकर चूमा अपने दोनों हाथों से बूब्स को दबाया और कुछ देर बाद एक हाथ को उसकी choot पर घुमाने लगा। अब mujhe उसकी choot पर उसके वो घुंघराले बाल बहुत अच्छे लग रहे थे, उसके बाद मैंने थोड़ा सा नीचे आते हुए उसके बूब्स को अपने मुँह में ले लिया वाह क्या रस था? बस mujhe तो मज़ा बहुत आ रहा था। अब में अपनी एक उंगली को उसकी choot की दरार पर घुमाने लगा और fir मैंने उसकी choot में डाल दिया, meri उंगली उसकी choot में ऐसे घुसी जैसे मख्खन में छुरी, उसकी choot बहुत गरम और गीली भी थी। अब उसकी जोश से भरी सिसकियाँ mujhe और भी मस्त कर रही थी। मैंने उसको छेड़ते हुए कहा कि आरती रानी अब बोलो में इसके आगे क्या करूँ? वो बोली कि साहब अब आप mujhe और मत तड़पाए बस अब कर दीजिए, उसने मुझसे सिसकियाँ लेते हुए कहा। अब मैंने उसको कहा कि ऐसे नहीं तुम्हे बोलना होगा meri जान तभी mujhe अपने करीब खींचते हुए उसने कहा कि साहब डाल दीजिए ना।

fir मैंने शरारती अंदाज में उसको पूछा क्या डालूं और कहाँ डालूं? दोस्तों चुदाई का मज़ा वो सब शब्द सुनने में भी बहुत है, वो कहने लगी कि डाल दीजिए ना, अपना यह लंड मेरे अंदर उसने यह कहा और मेरे होठों से अपने होंठ चिपका लिए और इधर मेरे हाथ उसके बूब्स को मसलते ही जा रहे थे। fir कभी बहुत ज़ोर से दबाते तो कभी मसलते कभी में बूब्स को चूसता, कभी उसके होठों को चूसता और अब मैंने उसको कह ही दिया हाँ meri रानी अब मेरा यह लंड तेरी choot के अंदर जाएगा, तू इसके लिए तैयार रहना, बोल चोद दूँ? अब वो तुरंत बोली हाँ हाँ जल्दी से चोद दीजिए साहब और अब वो एकदम गरम थी। fir क्या था? मैंने अपने लंड को उसकी choot पर रखा और धक्का देकर अंदर घुसा दिया। दोस्तों वो एकदम ऐसे घुसा जैसे उसकी choot मेरे लंड के लिए ही बनी थी। fir मैंने हाथों से उसके बूब्स को दबाते हुए होठों से उसके गाल और होठों को चूसते हुए धक्के देकर उसको chodna शुरू किया और में बस चोदता ही रहा। मेरा ऐसा मन कर रहा था कि में उसको लगातार पूरे जीवन चोदता ही रहूं और मैंने बहुत कस कसकर choda उसको चोदते चोदते मेरा मन ही नहीं भर रहा था।

दोस्तों वो क्या मस्त चीज़ थी? बड़ी ही गरम कामुक और वो उछल उछलकर मुझसे अपनी चुदाई करवा रही थी और fir वो कहने लगी आह्ह्हह्ह साहब आप बहुत अच्छा चोद रहे है उफ्फ्फ़ हाँ बस ऐसे ही चोदो बहुत जमकर चोदो धक्के देना बंद मत कीजिए और अब उसके हाथ meri पीठ पर कस रहे थे, अपने दोनों पैर उसने मेरे कूल्हों पर घुमा रखे थे और वो अपनी गांड से उछाल रही थी और बहुत मस्ती से अपनी चुदाई करवा रही थी। अब में भी जोश में आकर उसको चोद रहा था। में भी उसको यह बात अब कहने से रुक ना सका और मैंने उसको कहा आरती रानी तेरी यह choot तो चोदने के लिए ही बनी है रानी वाह क्या मस्त choot है? mujhe इसमे धक्के देने से बहुत मज़ा आ रहा है, तू बोल ना तुझे meri यह चुदाई कैसी लग रही है? साहब अब आप रुकिये मत बस mujhe चोदते रहे बस चोदो। fir इस तरह हम ना जाने कितनी देर तक चुदाई के मज़े लेते हुए बहुत कस कसकर धक्के देकर चोदते हुए झड़ गये, लेकिन वो क्या मस्त गरम चीज़ थी? वो शायद लगातार चोदने के लिए ही बनी थी। दोस्तों मेरा अब भी मन नहीं भरा था और करीब बीस मिनट के बाद मैंने एक बार fir से अपना लंड उसके मुँह में डाल दिया और उसको बहुत देर तक अपना लंड चुसवाया।

fir कुछ देर बाद हम दोनों 69 आसन में आ गए और जब वो मेरा लंड चूस रही थी, मैंने उसकी सेक्सी रसभरी choot को अपनी जीभ से chodna शुरू किया। mujhe खासकर दूसरी बार तो इतना मज़ा आया कि में किसी भी शब्दों में आप लोगो को बता नहीं सकता। दोस्तों इस बार जब मैंने उसकी choot में अपना लंड डालकर उसकी चुदाई करनी शुरू कि में उसको बहुत देर तक लगातार चोदता रहा। मेरे लंड को अब झड़ने में बहुत समय लगा, जिसकी वजह से mujhe और में उसको चुदाई का भरपूर मज़ा वो आनंद देता रहा। fir चुदाई खत्म होने के बाद मैंने अपना वीर्य धक्कों के साथ ही उसकी choot में डाल दिया। fir कुछ देर लेटे रहने के बाद उठकर कपड़े पहनने के बाद मैंने उसको कहा कि आरती रानी बस अब तुम मुझसे ऐसे ही हर दिन अपनी चुदाई करवाती रहना वरना यह लंड तुम्हे तुम्हारे घर पर आकर जरुर चोद देगा। अब वो कहने लगी कि साहब आज आपने meri इतनी अच्छी तरह से जमकर चुदाई की है, जिसके लिए में बहुत समय से तरस रही थी। अब तो में खुद भी हर एक अच्छे मौके में आपसे अपनी चुदाई जरुर करवाना चाहती हूँ, चाहे आप mujhe उसके लिए पैसे ना भी दो, लेकिन में आपकी चुदाई से वो सुख संतुष्टि पाना चाहती हूँ जो mujhe आप पहली बार आपसे मिला है।

अब कपड़े पहनने के बाद भी मेरे हाथ उसके बूब्स को हल्के हल्के मसलते रहे थे। में उसकी निप्पल को दबा रहा था और उसके साथ साथ में उसके गालों और होठों को भी चूमता रहा। fir उसी समय मेरा एक हाथ उसकी choot पर चला जाता था और में हल्के से उसकी choot को भी दबाने सहलाने लगा था। अब कुछ देर बाद वो यह शब्द कहकर उठी कि साहब अब mujhe जाना होगा, मैंने उसका हाथ पकड़कर अपने लंड पर रख दिया और कहा कि रानी मेरा एक बार और तुम्हे चोदने का मन कर रहा है, में अब तुम्हारे कपड़े नहीं उतारूँगा। दोस्तों सच में मेरा लंड अब उसकी चुदाई के लिए तनकर खड़ा हो गया था और दोबारा जमकर चुदाई के लिए तैयार था। fir मैंने उसको झट से लेटा दिया, उसकी साड़ी ऊपर उठाई और fir अपना लंड उसकी choot में डाल दिया। दोस्तों इस बार मैंने उसको खचाखच बड़े तेज धक्के देकर choda और बहुत देर तक धक्के दिए और बहुत जमकर choda और में बस चोदता ही रहा। fir mujhe पता नहीं कब चोदते चोदते मेरा लंड झड़ गया और मैंने कसकर उसको अपनी बाहों में जकड़ लिया उसको चूमते हुए बूब्स को दबाते हुए मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उसको विदा किया, लेकिन उस पहली चुदाई के बाद भी मैंने उसको बहुत बार अपने लंड के मज़े दिए। वो meri चुदाई से हमेशा खुश हुई और उसने हमेशा मेरा पूरा पूरा साथ दिया और मेरे साथ मज़े किए ।।

धन्यवाद